उज्जैन का काल भैरव मंदिर, जिस मंदिर में प्रसाद के रूप में शराब बांटी जाती है

Kal_Bhairav_temple_Ujjainहर एक मंदिर की यह प्रथा होती है कि जो भोग भगवान को लगाया जाता है वही प्रसाद स्वरूप भक्तों को बांट दिया जाता है। आज हम आपको ऐसे मंदिर में ले चलते हैं जहाँ मंदिर के भगवान के दर्शन लिए आए भक्तों को शराब प्रसाद के रूप वितरित की जाती है। यह बात सुनते ही उन लोगों के चेहरे पर रौनक आ गई होगी जो व्यक्ति मदिरा के सेवन के शौकीन है।

आपके मन में यही सवाल उठ रहा होगा कि ऐसा कौन सा अनोखा मंदिर है जहाँ के देवता भोग के रूप में शराब पसंद करते हैं। एक आम मंदिर में देखने को मिलता है कि किसी भक्त द्वारा मंदिर में चढ़ाने के लिए अपनी पूजा की थाल में फूल, माला और मिष्ठान आदि चढ़ाने के लिए ले जाया जाता है।

लेकिन इस मंदिर में आप यह देखकर अचंभित रह जाएंगे कि इस देव स्थान पर पहुंचने वाले भक्त अपने साथ फूल, माला के साथ शराब की बोतलें लेकर जाते हैं। इसीलिए इस मंदिर के आस पास शराब की दुकानें खूब है।

कहां है यह अदभुत मंदिर

यह पूजा का धाम मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। इस अदभुत देव स्थान का नाम है-काल भैरव मंदिर, जहाँ भगवान काल भैरव की पूजा की जाती है। यह भव्य मंदिर उज्जैन से लगभग 8 किलोमीटर दूर शिप्रा नदी के किनारे बना हुआ है। यह मंदिर अति प्राचीन है। इतिहासकारों के अनुसार यह काल भैरव मंदिर लगभग हजारों वर्ष पुराना हो सकता है।

किसने कराया इस काल भैरव मंदिर का निर्माण

यह हजारों वर्ष पुराना मंदिर कब किसने बनवाया इस बात का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन हां, इस बात की जानकारी अवश्य मिलती है कि जब परमार वंश के नरेशों ने इस मंदिर को नष्ट होने की स्थिति में देखा तब इसका जीर्णोद्धार कराया और इस मंदिर को भव्य स्वरूप प्रदान किया।

वास्तव में परमार वंश के शासक भी काल भैरव के परम भक्त थे। उन्होंने इस प्राचीन कालीन देव स्थान के अस्तित्व बचाये रखने के लिये अपना अमूल्य योगदान दिया।

इस मंदिर के देवता मदिरा पीते हैं

उज्जैन में स्थित इस काल भैरव मंदिर की अदभुत बात यह है कि इस मंदिर के देवता मदिरा का सेवन करते हैं। यह प्रथा कब और किस तरह आरंभ हुई, इसका कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिलता है।

लेकिन यह आश्चर्यजनक सत्य है कि इस मंदिर की भगवान काल भैरव की प्रतिमा के मुख पर शराब लगाते ही देखते ही देखते वह शराब खत्म हो जाती है।

वैज्ञानिकों ने इस बारे में काफी पता लगाने की कोशिश की लेकिन उन्हें हर बार असफलता ही हाथ लगी। काल भैरव की मूर्ति का ये रहस्य सदैव से रहस्य बना हुआ है कि यह भगवान की मूर्ति शराब कैसे पी जाती है।

तंत्र-मंत्र सिद्ध करने का स्थान था यह मंदिर

प्राचीन काल में, कभी यह काल भैरव मंदिर देश-विदेश के तांत्रिकों की सिद्धि प्राप्त करने का प्रमुख केंद्र था। दूर-दराज से आने वाले तांत्रिकों का यहां जमावड़ा लगता था। वे यहाँ महीनों रुक कर अपने तंत्र-मंत्र की शक्ति का विकास करते थे।

अपनी तंत्र शक्ति को सिद्ध करने के लिए यहाँ वाम मार्गी तांत्रिक लोग मांस, मदिरा, धन और बलि आदि चढ़ाते थे। उस समय भयवश तांत्रिकों के अलावा अन्य कोई साधारण भक्त इस मंदिर के आसपास नहीं आता था। लेकिन समय बदलता गया, धीरे-धीरे यहां तांत्रिकों का डेरा कम होता गया और सामान्य भक्त यहाँ आने लगे।

पापों से मुक्ति मिलती है यहाँ

यह वह देव स्थान है जहां भक्तों को अपने पापों से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने स्वयं शिप्रा नदी के किनारे यह स्थान पापों की मुक्ति के लिए बनाया था।

मनुष्य योनि में जन्म लेने वाले व्यक्ति यदि दरिद्रता, बीमारी, मुकदमेबाजी या निःसंतान होने की स्थिति से ग्रस्त रहते हैं तो लोगों का यही कहना होता है कि पीड़ित व्यक्ति पूर्व जन्म के पापों का प्रतिफल पा रहा है।

इसलिए इस काल भैरव मंदिर में आने के पश्चात व्यक्ति अपने जन्म जन्मांतर के पापों का प्रायश्चित करता है ताकि उसका जीवन सुखमय हो और वह लंबा जीवन पा सके।

इस मंदिर का प्रसाद लेते ही शराब छूट जाती है

इस मंदिर में आने वाले कुछ लोगों ने अपने अनुभव बताये कि यह भारत का एक अनोखा मंदिर है जो मद्यपान निषेध को बढ़ावा देता है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में प्रसाद के रूप में बांटी जाने वाली शराब के सेवन करते ही भक्तों में शराब के प्रति अनिच्छा पैदा होने लगती है।

यदि वह व्यक्ति शराब का सेवन करता है तो धीरे-धीरे उसका शराब पीना छूट जाता है। इस मंदिर के भगवान मदिरा रूपी जहर इसीलिए पीते हैं ताकि धरती के मनुष्य के जीवन से नशे का जहरीलापन दूर हो सके।

चमत्कारी मंदिर

काल भैरव मंदिर भारत के उन अदभुत चमत्कारी मंदिरों में से है जिसकी ख्याति देश में ही नहीं विदेशों में भी फैली हुई हैं। इस मंदिर के देवता द्वारा मदिरा पान करने का आश्चर्यजनक सत्य सुनकर दूर-दूर से लोग इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं।