इंदौर के बिजासन माता का मंदिर, जहां मछलियाँ दिलाती हैं माँ दुर्गा का आशीर्वाद

इंदौर के बिजासन माता का मंदिर, जहां मछलियाँ दिलाती हैं माँ दुर्गा का आशीर्वादइस प्रकृति में उपस्थित हर छोटे और बड़े जीव का अपना महत्व है। भारत के कई मंदिरों में जहाँ मूषक गणेश जी तक भक्तों की बात पहुंचाते हैं वहीं नंदी महाराज भगवान शिव तक पहुँचने का माध्यम बनते हैं। इसी तरह इस देवी के अदभुद धाम में मछलियां माँ दुर्गा का आशीर्वाद दिलाती है। यह वही मंदिर है जहाँ प्राचीन काल में तांत्रिक अपने तंत्र-मंत्र की विद्या जगाते थे और देवी माँ से सिद्धि प्राप्त करते थे।

संतान दायिनी हैं माँ 

तंत्र-मंत्र से जुड़े हुये इस धाम में पाँव रखते ही भक्त मां दुर्गा के कृपा पात्र बन जाते हैं। इस धाम की माता को संतान दायिनी भी कहा जाता है। न जाने यहाँ ऐसे हजारों उदाहरण है जिसमें इस धाम की देवी का चमत्कार देखने को मिलता है। जिन भी निःसंतान दंपत्ति ने इस मंदिर में माथा टेका, उन्हें संतान प्राप्ति का वरदान मिल गया।

डॉक्टर खुद अचंभे में है कि उनके द्वारा मना किये हुये दंपत्तियों को भी इस धाम की देवी के शरण में आकर संतान की प्राप्ति कैसे हो गई? यह वह सच्चा धाम है जहाँ के चमत्कार के आगे चिकित्सा विज्ञान भी आश्चर्य चकित हैं।

कहाँ है ये मंदिर

यह मंदिर इंदौर के देवी अहिल्या बाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निकट टेकरी नामक स्थान पर स्थित है। जहां देवी मां अपने नौ स्वरुपों में विराजमान हैं। दुर्गा देवी के इस धाम को बिजासन माता के मंदिर के नाम से जाना जाता है।

क्या है इस मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। वर्ष 1760 में महाराज शिवाजी राव होल्कर ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। पुराने जमाने में इस मंदिर के आसपास काले हिरण का जंगल हुआ करता था।

कभी यह मंदिर तंत्र-मंत्र और सिद्धि प्राप्ति के लिये प्रसिद्ध स्थान था। तांत्रिकों का यहाँ जमघट लगता था। दूर-दूर से लोग यहाँ साधना करने और अपना तंत्र-मंत्र सिद्ध करने आते थे। उस समय इस पूरे क्षेत्र में तंत्र-मंत्र गूंजते थे।

हर खास और आम व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है यहाँ 

इस देवी के धाम में हर खास और आम व्यक्ति की मनौती पूरी होती है। राजनीति, व्यवसाय और शिक्षा और चिकित्सा से जुड़े हुए नामी-गिरामी लोग इस धाम में आकर अपना माथा टेकते हैं। इस मंदिर के निर्माण की कहानी बड़ी दिलचस्प है।

महाराजा शिवाजी राव होलकर माँ दुर्गा के परम भक्त थे। वह जिस भी बड़े काम के लिए निकलते थे तो दुर्गा जी का आशीर्वाद अवश्य लेते थे। एक दिन यहाँ जंगल में उन्हें एक छोटी सी बच्ची मिली।

राजा ने पूछा हे लड़की, तुम इस घने जंगल में क्यों भटक रही हो? लड़की ने उत्तर दिया कि राजा तुम मेरा मंदिर बनवा दो तो मैं तुम्हारे राज्य में ही निवास करने लगूंगी। राजा समझ गये कि यह कोई साधारण लड़की नहीं, बल्कि माँ दुर्गा का ही स्वरूप है।

राजा उस छोटी लड़की के चरणों में पड़ गये। माँ दुर्गा नें राजा को यशस्वी होने का आशीर्वाद दिया। उसी समय महाराजा शिवाजी राव होलकर ने मां दुर्गा का एक भव्य मंदिर बनाने का संकल्प ले लिया।

अपने इसी संकल्प को साकार रूप देते हुए उन्होंने यहाँ इस प्रकृति की गोद में माँ दुर्गा के मंदिर की स्थापना करायी। इस हरे-भरे परिवेश में बिजासन माता के मंदिर की स्थापना करने के बाद तो महाराजा शिवाजी राव होलकर की यश पताका दूर-दूर तक फैल गयी।

मंदिर के प्राचीन तालाब का रहस्य 

इस बिजासन माता के मंदिर के प्रांगण में एक प्राचीन तालाब है। ऐसी मान्यता है कि इस तालाब की मछलियों को चारा खिलाने से भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

इस चमत्कारी तालाब की ढेरों कहानियाँ यहाँ सुनने को मिलती हैं। भोपाल से इस देवी के धाम में पहुँची लगभग 20 वर्षीय शिवानी अपना अनुभव बताती हैं कि करीब 6 महीने पहले उनके शरीर पर सफेद दाग दिखाई देने लगे थे।

उन्होंने बताया “मैं तो अपने शरीर पर उन सफेद दागों को देखकर डर ही गयी थी। सोंचती थी कि अब मेरी शादी कैसे होगी?” तब किसी ने उनको बिजासन माता की मंदिर के प्रताप के बारे में बताया।

नवरात्र में यहाँ पानी से दीपक जल उठते हैं

उन्होनें देवी दुर्गा के इस धाम में आकर यहाँ के तालाब की मछलियों को दाना खिलाया। माँ की कृपा का चमत्कार दिखायी देने लगा और कुछ ही दिनों बाद मेरे शरीर के सफेद दाग हल्के पड़ने लगे। अब वह हर महीने बिजासन माता के मंदिर में आती हैं और मछलियों को चारा खिलाती हैं। इस मंदिर की एक मान्यता यह भी है कि नवरात्र के दिनों में यहाँ पानी से दीपक जल उठते हैं।

यहाँ इस धाम की बिजासन माता पूरे देश में संतान देने का वरदान देने वाली देवी के रूप में प्रसिद्ध हैं। देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी भक्तगण यहाँ अपनी मनोकामना पूरी करने के लिये इस धाम की देवी के शरण में आते हैं।

विदेशों से भी लोग आते हैं यहाँ 

वहाँ मुझे एक रशियन महिला दिखाई दीं। उन्होनें बताया कि उनके साथ जो उनका यह नन्हा सा बेटा नज़र आ रहा है वह बिजासन माता के आशीर्वाद से ही पैदा हुआ है। तब से वह अक्सर माँ दुर्गा के इस धाम में आती हैं।

इसी धाम में हमें एक महिला डॉक्टर मिलीं। वे कई बार गर्भवती होने के बावजूद माँ नहीं बन सकीं। अब उन्हें माँ के कृपा की ही आस थी। इस देवी माँ के धाम में आकर पता चलता है कि यह भारत का अनोखा मंदिर है जहाँ माँ सूनी गोद भरने के लिए जानी जाती है।

यह दुर्गा देवी का वह धाम है जहाँ माँ के ममता की वर्षा हो रही है। जो कोई भी आता है माँ की कृपा से सराबोर हो जाता है। नवरात्र के दिनों में यहाँ भारी मेला लगता है। दूर-दराज से लाखों की संख्या में भक्तगण बिजासन माता का आशीर्वाद लेने के लिये इस धाम में आते हैं।