अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की वह कहानी जिसे जानकर आपकी आँखे भर आयेंगी

abraham_lincolnक्या आपको मालूम है़ कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन अपने शुरुआती दिनों में इतने ग़रीब थे कि एक बार उनको, केवल एक पुस्तक पढ़ने के लिए 10 दिन तक मजदूरी करनी पड़ी। जी हाँ, यह सच है़। गरीबी, मायूसी, बेबसी और उदासी ही अब्राहम लिंकन के बचपन के मित्र थे। जो उन्हें विषम परिस्थितियों से जूझने की शिक्षा देते थे।

अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति अब्राहिम लिंकन वह व्यक्ति थे, जिनके पास बचपन के दिनों में किताबें खरीदने तक के लिए पैसा नहीं होता था। उन्हें किसी विद्यालय में इसलिए प्रवेश नहीं दिलाया गया क्योंकि उनके अभिवावक के पास उनकी फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे। लेकिन उसके बावजूद उन्होंने वह शिक्षा प्राप्त की जो बेमिसाल थी।

अब्राहम लिंकन को किताबे पढ़ने का बहुत शौक था 

अब्राहम लिंकन के एक ही शौक ने उन्हें जमीन की धूल से उठाकर आसमान का सितारा बना दिया। उनका वह शौक था किताबों से बेपनाह मोहब्बत, किसी किताब को जल्द से जल्द पढ़ लेने की दीवानगी के तमाम किस्से उनकी जिंदगी की किताब के पन्नों में दर्ज हैं। ज्ञान, विज्ञान, इतिहास, भाषा, साहित्य और कानून आदि से संबंधित किताबे हाथ में मिलते ही वह उसे पूरा पढ़कर ही दम लेते थे।

अब्राहम लिंकन की किताबों के पढ़ने में उनकी गति जिस किसी ने भी जानी वह आश्चर्य चकित रह गया। एक बार अब्राहम लिंकन अपने किसी परिचित व्यक्ति से लगभग 1000 पन्नों की एक किताब पढ़ने के लिए लेकर आये और जब उसे उसी दिन शाम को जब वह किताब उन व्यक्ति को लौटाने के लिए गये, जिनसे वह किताब माँगकर लाये थे। तब वह व्यक्ति अब्राहम लिंकन से बोला कि ‘अरे अब्राहम, किताब ले गये थे तो पढ़ भी लेते, कल लौटा देते’।

इस बात पर अब्राहम लिंकन ने जो उत्तर दिया वह चौंकाने वाला था। अब्राहम लिंकन ने कहा ‘मैं पूरी किताब पढ़ ही नहीं चुका बल्कि यह पूरी किताब मुझे मुँह जबानी कंठस्थ हो गयी है। पूछो कहीं से इस पुस्तक में से, मैं उसका जवाब दूंगा’। किताब देने वाले उन व्यक्ति ने सोंचा की शायद अब्राहम लिंकन मजाक कर रहें हैं।

फिर उन परिचित व्यक्ति ने किताब अपने हाथ लेकर उसमें से एक सवाल पूछा। आश्चर्य की बात यह नहीं उन्होंने उस सवाल का सही-सही जवाब दिया। बल्कि अब्राहम ने यह भी बताया कि उनके इस सवाल का उत्तर किस पेज नंबर पर कौन सी लाइन में दिया गया है।

अब्राहम लिंकन के जीवन की वह घटना जिसने उन्हें आसमान की बुलंदियों पर पहुँचाया 

अब हम जानते हैं कि अब्राहम लिंकन के जीवन की वह घटना कौन सी थी जिस घटना में किसी के घर से एक किताब को पढ़ने के लिए लाने के बाद उन्हें मजदूरी तक करनी पड़ी। यह उस समय की बात है जब अब्राहम लिंकन अपनी लॉ की पढ़ाई कर रहे थे। एक दिन उन्हें पता चला कि उनके ही मोहल्ले से कुछ दूर एक व्यक्ति रहने लगे हैं जो एक लॉ कॉलेज में प्रोफेसर हैं ।

अब्राहम लिंकन ने सोंचा की उनके पास कानून की बहुत सारी किताबें होंगीं। उनसे माँगकर कुछ कानून की किताबें ले आऊं। ताकि कानून के क्षेत्र में उनका ज्ञान और बढ़ सके। ऐसा सोंचकर अब्राहम उन प्रोफेसर साहब के पास गये और उनसे उनकी लॉ की बुक्स देनें का निवेदन किया। अब्राहम लिंकन को उन प्रोफेसर साहब ने अपनी दो किताबें पढ़ने के लिए दे दीं और किताबें देते देते समय उन्होंने अब्राहम से कहा कि उन्हें संभाल कर रखना और पढ़ने के बाद वापस कर देना।

घर ले जाने के बाद अब्राहम लिंकन ने दो घंटे में पहली पुस्तक पढ़कर खत्म कर दी। प्रोफेसर साहब की उस किताब को घर के अंदर रख दी क्यों कि वह उसे पढ़ चुके थे। अब दूसरी किताब को पढ़ने के उद्देश्य से उसे लेकर बाहर आंगन में आ गये। इसके बाद अब्राहम लिंकन बाहर आंगन में पड़ी चारपाई पर लेटकर प्रोफेसर साहब के द्वारा दी गयी दूसरी किताब पढ़ने लगे।

किताब पढ़ लेने के बाद न जाने कब अब्राहम लिंकन को नींद आ गयी। वह उस किताब को सीने से लगाकर ही सो गये थे। दिन भर की थकान के बाद उन्हें नींद बहुत गहरी आ गयी थी। रात दो बजे एकाएक बारिश होने लगी। लेकिन अब्राहम लिंकन नींद में न जाने कौन सा स्वप्न देख रहे थे। वह बारिश में भीगते हुये भी  सोते रहे। सुबह जब उनकी नींद खुली तो भौचक्के रह गये।

दरअसल प्रोफेसर साहब की दूसरी किताब जो उनके सीने से चिपकी थी; बुरी तरह से भींग गयी थी। किताबों के पन्ने एक दूसरे से चिपक गये थे। अब्राहम लिंकन उस पुस्तक की यह दशा देखकर बहुत डर गये। क्योंकि वह लॉ कॉलेज के प्रोफेसर साहब की किताब थी। अब वह इस किताब को प्रोफेसर साहब को किस प्रकार लौटायेंगे यह सोंचते रहे। लेकिन फिर उन्होंने विचार किया कि प्रोफेसर साहब के पास चलते हैं। वहाँ जो कुछ भी होगा देखा जायेगा।

अगले दिन अब्राहम लिंकन उन लॉ कॉलेज के प्रोफेसर साहब के घर पहुँचे। एक किताब जो, भीगी नहीं थी उसे लौटा दी। जब प्रोफेसर साहब ने अपनी दूसरी किताब के बारे में पूछा तो अब्राहम लिंकन ने दूसरी भीग कर खराब हुई किताब भी आगे कर दी, जो अब तक पीछे छिपाये हुये थे। प्रोफेसर साहब अपनी उस भीग कर खराब हुई किताब देखकर गुस्से से बहुत आग बबूला हो गये। क्योंकि उन्हें अपनी किताबों से बहुत प्यार था।

उन्होंने अब्राहम लिंकन से कहा कि तुमने मेरी किताब पानी में भिगो कर बहुत बड़ा अपराध किया है। अब तुम्हें इस किताब का मूल्य चुकाना होगा। अब्राहम लिंकन ने कहा कि मेरे पास पैसे नहीं हैं। तब यह निश्चित हुआ कि अब अब्राहम को उन प्रोफेसर साहब के घर पर नौकर की तरह काम करना होगा।

अब्राहम लिंकन ने उस किताब के मूल्य के बदले में प्रोफेसर साहब के घर पर एक मजदूर की तरह पूरे दस दिनों तक काम किया। अब्राहम लिंकन उन प्रोफेसर साहब के लॉन में पौधों को पानी डालते, उनके लिए बाजार से वेजिटेबल, फ्रूट्स और ब्रेड आदि लाते। प्रोफेसर साहब अब्राहम लिंकन के काम से बहुत प्रसन्न थे। उन्होंने अब्राहम लिंकन को खाली समय में किताबें पढ़ने की छूट दे दी।

प्रोफेसर द्वारा दिए गए सबक ने उनकी ज़िन्दगी बदल कर रख दी 

वह अब दिन पर काम के बाद रात के समय प्रोफेसर साहब के घर पर उनकी किताबें पढ़ते। दस दिन काम करने के बाद जब अब्राहम लिंकन वापस जाने लगे तो उन्होंने अब्राहम के सर पर हाथ रखा और ढेर सारा आशीर्वाद दिया। उन्होंने अब्राहम लिंकन को समझाया कि उन्नति के रास्ते में आलस्य और लापरवाही बहुत बड़े पत्थर हैं।

किताब भीगने पर उनके द्वारा दिया यह दंड उनके लिए एक सबक था। अब्राहम लिंकन ने प्रोफेसर साहब की वह बात गांठ बाँध ली। फिर उन्होंने अपने जीवन में वह कर दिखाया जो असंभव था। अब्राहम लिंकन को आसमान की बुलंदियों तक पहुँचाने वाली लोगों के दिल की दुआयें थीं।

क्या आपको पता है़ कि अब्राहम लिंकन अपने वकालत के पेशे में उन लोगों से एक पैसा नहीं लेते थे जो गरीब और बेबस थे। उन्होंने समाज के उन लोगों के उत्थान के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी, जो दुखी थे और लाचार थे। ऊपर वाले ने भी अब उनके साथ न्याय किया और उन्हें अमेरिका की सबसे ऊँची कुर्सी पर बैठा दिया।

यह वह समय था जब अमेरिका में गोरे काले का भेद था। लेकिन इसके बावजूद वर्ष 1865 में अमेरिका का प्रेसिडेंट एक काले व्यक्ति का बनना, किसी चमत्कार से कम नहीं था। लेकिन यह  चमत्कार था उस प्यार का ,जो अब्राहम लिंकन ने आम लोगों के बीच बाँटा था।