दुनिया के सबसे बड़े हत्यारे के ग़ायब होने का रहस्य


दुनिया के नृशंसतम हत्या कांड का जब भी ज़िक्र होगा, पोलैंड स्थित हिटलर के औशोविट्ज़ डेथ कैंप (Auschwitz Death Camp) में नात्ज़ियों द्वारा किया गया यहूदियों का भीषण नरसंहार ज़रूर सामने आएगा | हिटलर द्वारा स्थापित औशोविट्ज़ डेथ कैंप वो स्थान है जहाँ की बातें सुनकर मानवता सिहर उठती है, नसें सुलग उठती हैं और कलेजा काँप जाता है |

ये वो स्थान है जहाँ द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान करीब साठ लाख यहूदियों को मौत के घाट उतार दिया गया | हिटलर के आदेशानुसार यहाँ काफी लोगों को जहरीली गैस से मार दिया जाता और फिर उनकी लाशों को विशाल अग्नि की भट्टियों में जला दिया जाता | कभी-कभी इस काम की रफ़्तार इतनी तेज़ होती की हर 15 मिनट में लगभग 200 लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाता |

यहूदियों के प्रति हिटलर की बेइंतेहा नफ़रत यहूदियों के इस भीषण नर-संहार के रूप में सामने आई और औशोविट्ज़ कैंप मौत का दूसरा नाम बन गया,.. एक ऐसा नाम जिसे सुनकर ज़िन्दगी थर्रा उठी | ये कैंप एक ऐसी जगह और इस तरह से बनाया गया था कि यहाँ से भाग पाना लगभग असंभव था |

कैंप में इस तरह के लगभग चार क्रीमेटोरियम या शवदाहगृह थे जिसमे हर रोज़ लगभग 4 से 5 हज़ार लाशें जलाई जाती थी | जो गैस चैम्बर में मरने से किसी तरह से बच जाते उनसे या तो अमानवीय तरीके से काम लिया जाता या उनका, हिटलर द्वारा निर्देशित खतरनाक और दर्दनाक वैज्ञानिक प्रयोगों में उपयोग किया जाता |

ये इतिहास का वो भयानक नरसंहार था जिसमे मरने वालो में 15 लाख तो सिर्फ बच्चे थे | कई यहूदी जो किस्मत वाले थे, अपनी जान बचा के देश छोड़ कर भाग गए और जो बचे वो इस प्रकार के यातना गृहों में, क्रूरता के चलते तिल-तिल कर मरे | युद्ध काल में ही इस भयावह कत्लखाने की खबर समूचे यूरोप में फ़ैल चुकी थी |

आम जन मानस को ये आशा थी की इस युद्ध के बाद ऐसे मौत के कारखाने को चलाने वाले पकड़े जायेंगे और कठोर से कठोर दंड दिया जाएगा मगर हुआ कुछ और ही | उनमे से कुछ तो पकड़ में आये पर काफी सारे हत्यारे गायब हो गए |

इन सब में सबसे खतरनाक औशोविट्ज़ डेथ कैंप का मुख्य प्रबंधक और संचालक तो ऐसा अदृश्य हुआ की उसका कोई सुराग ही नहीं मिला | ये जर्मन नात्ज़ी था जिसका नाम था ओटो अडोल्फ़ आइकमन (Otto Adolf Eichmann) | कुछ यहूदियों ने तो ठान लिया था कि इस हत्यारे को ढूंढ के रहेंगे और इसे ऐसी सज़ा देंगे की लोग वर्षों तक याद रखेंगे |

कई वर्षों तक यह खोज चली | कुछ लोग अप्रतिम धैर्य के साथ, इसकी खोज में, कई महाद्वीपों की ख़ाक छानते रहे लेकिन ये हत्यारा ऐसा ग़ायब हुआ कि इसका कुछ पता ही न चला | सन 1945 में जब हिटलर का पतन हुआ, उस समय इस्राइल का जन्म नहीं हुआ था, लेकिन यहूदियों को पूरा विश्वास था कि उनका इस्राइल देश जरूर बनेगा |

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